भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर साल 2025 के अंत में नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में पैसेंजर व्हीकल (PV) यानी कारों की बिक्री में 26.64% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस ग्रोथ का सबसे बड़ा योगदान शहरों से नहीं, बल्कि गांव और ग्रामीण इलाकों से आया है।
जहां शहरी बाजारों में बिक्री 22.93% बढ़ी, वहीं ग्रामीण बाजारों में यह आंकड़ा 32.40% तक पहुंच गया, जिससे साफ है कि अब गांव भारत के ऑटो सेक्टर का नया ग्रोथ इंजन बनते जा रहे हैं।
ग्रामीण बाजार बना ऑटो इंडस्ट्री का नया ग्रोथ इंजन
FADA के अध्यक्ष सी.एस. विग्नेश्वर के मुताबिक, साल 2025 ऑटो इंडस्ट्री के लिए बेहद शानदार रहा। उन्होंने बताया कि साल की शुरुआत यानी जनवरी से अगस्त तक बाजार में थोड़ी सुस्ती रही, लेकिन सितंबर के बाद बिक्री में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।
इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रही GST 2.0 नीति, जिसके लागू होने से छोटी कारों, टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स पर टैक्स में राहत मिली। इससे वाहन आम लोगों के बजट में आ गए और खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा डीलरों के पास गाड़ियों का स्टॉक (Inventory) भी नियंत्रित स्तर पर आ गया है, जो बाजार की सेहत के लिए सकारात्मक संकेत है।
गांवों में क्यों बढ़ रही है चौपहिया गाड़ियों की मांग?
पहले गांवों में कार को शान-ओ-शौकत की चीज माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। बेहतर सड़कों, बढ़ती आय, डिजिटल फाइनेंस की सुविधा और आसान लोन विकल्पों ने ग्रामीण ग्राहकों को कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया है।
इसके अलावा खेती से होने वाली आमदनी, सरकारी योजनाएं और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ने से गांवों में क्रय शक्ति मजबूत हुई है। लोग अब सिर्फ बाइक या ट्रैक्टर तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि परिवार की सुविधा और सुरक्षित सफर के लिए कार को प्राथमिकता दे रहे हैं।
CNG और इलेक्ट्रिक कार बनी पहली पसंद
FADA की रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका मुख्य कारण है:
- कम ईंधन खर्च
- पेट्रोल-डीजल की तुलना में सस्ता ऑपरेशन
- सरकार की सब्सिडी और टैक्स छूट
- पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता
ग्रामीण क्षेत्रों में अब CNG स्टेशन और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी धीरे-धीरे विकसित हो रहा है, जिससे लोग इन विकल्पों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
दिसंबर 2025 में कुल वाहन बिक्री का आंकड़ा
दिसंबर 2025 में भारत में कुल 20,28,821 वाहनों की बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले साल की तुलना में 14.63% की वृद्धि दर्शाती है। इसमें पैसेंजर व्हीकल्स के साथ-साथ टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट का भी अहम योगदान रहा।
ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ग्रोथ ट्रेंड 2026 की शुरुआत में भी जारी रहेगा।
जनवरी 2026 में बिक्री और बढ़ने की उम्मीद
लगभग 70% डीलरों का मानना है कि जनवरी 2026 में संक्रांति, पोंगल और शादी के सीजन के चलते वाहन बिक्री में और तेजी आएगी। त्योहारों के दौरान शुभ मुहूर्त और आकर्षक ऑफर्स ग्राहकों को नई गाड़ी खरीदने के लिए प्रेरित करते हैं।
कंपनियां भी इस मौके पर डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और आसान फाइनेंस स्कीम्स पेश कर रही हैं, जिससे मांग को और बल मिल सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर कहा जाए तो भारत का ऑटो बाजार अब सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। गांव और कस्बे तेजी से नई गाड़ियों के बड़े बाजार बनते जा रहे हैं। CNG और इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती लोकप्रियता, टैक्स में राहत, बेहतर सड़कें और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस बदलाव की मुख्य वजह हैं।
अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में ग्रामीण भारत ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का सबसे मजबूत स्तंभ बन सकता है।

