आइशर ने इंटरसिटी रूट्स के लिए 13.5 मीटर की इलेक्ट्रिक स्लीपर बस डिलीवर की; मार्च 2026 तक 35 बसें चलेंगी

आइशर मोटर्स ने भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी यात्रा में एक बड़ा कदम उठाते हुए 13.5 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक स्लीपर बस की डिलीवरी की है, जिसे खास तौर पर लंबी दूरी की इंटरसिटी यात्राओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उपलब्धि टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कमर्शियल ट्रांसपोर्ट के प्रति आइशर की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि मार्च 2026 तक कुल 35 इलेक्ट्रिक स्लीपर बसें सड़कों पर उतारी जाएंगी।

लंबी दूरी की इंटरसिटी यात्रा के लिए खास डिज़ाइन

नई 13.5 मीटर इलेक्ट्रिक स्लीपर बस को ओवरनाइट और लंबी दूरी के रूट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। पारंपरिक डीज़ल स्लीपर बसों की तुलना में, यह इलेक्ट्रिक मॉडल यात्रियों के आराम और ऑपरेटर की कार्यक्षमता दोनों पर विशेष ध्यान देता है।

इसमें आरामदायक स्लीपर बर्थ, चौड़े गलियारे, सॉफ्ट इंटीरियर लाइटिंग और बेहतर साउंड इंसुलेशन दिया गया है, जिससे यात्रियों को शांत और आरामदायक अनुभव मिलता है। कम वाइब्रेशन और कम शोर के कारण लंबी यात्राएं ज्यादा सुकूनभरी बनती हैं।

उन्नत इलेक्ट्रिक पावरट्रेन और बेहतर रेंज

इस इलेक्ट्रिक स्लीपर बस के केंद्र में एक हाई-कैपेसिटी बैटरी पैक है, जिसे इंटरसिटी ऑपरेशन के लिए अनुकूलित किया गया है। यह बस एक बार चार्ज करने पर प्रतिस्पर्धी रेंज देने में सक्षम है, जिससे यह लंबी दूरी के रूट्स पर भरोसेमंद साबित होती है।

फास्ट-चार्जिंग सपोर्ट के चलते, तय ब्रेक के दौरान बस को जल्दी चार्ज किया जा सकता है। इलेक्ट्रिक मोटर से मिलने वाला इंस्टेंट टॉर्क हाईवे पर स्मूद एक्सीलरेशन और चढ़ाई वाले रास्तों पर बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करता है।

यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर खास ध्यान

आइशर की इस इलेक्ट्रिक स्लीपर बस में यात्रियों के आराम को प्राथमिकता दी गई है। ऑल-वेदर एयर कंडीशनिंग, एर्गोनॉमिक स्लीपर बर्थ, यूएसबी चार्जिंग पोर्ट, रीडिंग लाइट्स और पर्सनल स्टोरेज स्पेस यात्रियों के सफर को और भी सुविधाजनक बनाते हैं।

सुरक्षा के लिहाज से इसमें एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल और रियल-टाइम व्हीकल मॉनिटरिंग जैसे फीचर्स शामिल हैं। कम शोर वाला इलेक्ट्रिक ऑपरेशन ड्राइवर की थकान भी कम करता है, जिससे लंबी दूरी की ड्राइविंग अधिक सुरक्षित बनती है।

कम ऑपरेटिंग कॉस्ट और पर्यावरणीय लाभ

इलेक्ट्रिक स्लीपर बस का एक बड़ा फायदा इसकी कम ऑपरेटिंग कॉस्ट है। डीज़ल बसों की तुलना में इसमें कम मूविंग पार्ट्स होते हैं, जिससे मेंटेनेंस खर्च और डाउनटाइम दोनों कम होते हैं। साथ ही, इलेक्ट्रिक एनर्जी की लागत ईंधन की तुलना में ज्यादा स्थिर और किफायती होती है।

पर्यावरण के लिहाज से यह बस शून्य टेलपाइप उत्सर्जन करती है, जिससे कार्बन उत्सर्जन और वायु प्रदूषण में कमी आती है। कम शोर के कारण शहरी बस टर्मिनल और हाईवे के आसपास के इलाकों में नॉइज़ पॉल्यूशन भी घटता है।

चरणबद्ध तैनाती की योजना

आइशर ने मार्च 2026 तक 35 इलेक्ट्रिक स्लीपर बसें तैनात करने की योजना बनाई है। यह चरणबद्ध रणनीति ऑपरेटर्स को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक बसों को अपने बेड़े में शामिल करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने में मदद करेगी।

यह पहल भारत सरकार के स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ परिवहन लक्ष्यों के अनुरूप है। इंटरसिटी स्लीपर सेगमेंट में इलेक्ट्रिक बसों की एंट्री एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है, जहां अब तक डीज़ल बसों का दबदबा रहा है।

भारत के इलेक्ट्रिक बस इकोसिस्टम को मजबूती

13.5 मीटर इलेक्ट्रिक स्लीपर बस की डिलीवरी सिर्फ एक नया प्रोडक्ट लॉन्च नहीं है, बल्कि यह भारत के इलेक्ट्रिक कमर्शियल व्हीकल इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। इससे यह साबित होता है कि अब इलेक्ट्रिक तकनीक लंबी दूरी की यात्राओं के लिए भी पूरी तरह सक्षम हो चुकी है।

चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार और बैटरी टेक्नोलॉजी में सुधार के साथ, आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक स्लीपर बसें निजी ऑपरेटर्स और राज्य परिवहन निगमों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकती हैं।

निष्कर्ष

आइशर की 13.5 मीटर इलेक्ट्रिक स्लीपर बस इंटरसिटी ट्रांसपोर्ट के लिए एक नया मानक स्थापित करती है। बेहतर आराम, उन्नत सुरक्षा, कम लागत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के साथ यह बस भारत में लंबी दूरी की यात्रा को नए स्तर पर ले जाने की क्षमता रखती है। मार्च 2026 तक 35 बसों की तैनाती आइशर की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

Leave a Comment